जय हो युवा शक्ति

२ महीने से बंद पड़ा मियार रोड को आज वाहन के लिए खोल लिया गया है जो काम भाग के मशीन से नहीं हो पा रहा था मात्र ४ कुल्हाड़ी और एक बेलचा से कर दिखाया जय हो युवा शक्ति ......

इस जज्बे को मेरा सलाम

एक शख्स जो ४ साल से लगातार वन्य जीव का कर रहा है सरंक्षण गर्मी हो धुप हो या बर्फ़बारी वोह हर पल मुस्तेद रहता है उसके निगरानी के चलते लाहुल के तंग्रोल के आबादी में काफी इजाफा हुआ है ....उसके इस जज्बे को मेरा सलाम ....................एक शख्स

थारंग-मियार

मानो वक्त थम सा गया था, बात सितम्बर महीने की है मैं और मेरे दोस्त ने मियार के भीतर तक जाने का प्रोग्राम बना लिया हर रोज़ इसी बात पर चर्चा होता था क्या ले क्या न ले अब सामान की सूची तैयार कर लिया था और बस शाम के ४ बजे था कैमरा और कुछ गर्म कपड़ो के साथ हम चल पडे। शुक्टो से हम दोनों को पैदल ही चलना था रास्ता इतना कठीन भी नहीं था शाम के ८ बजे हम थारंग मे गद्दी के डेरे मे पहुँच गये सामान को भीतर रख कर मैं कैमरा को ले कर बाहर प्रकर्ति के नजारो को कैद करने लगा कुछ समय के बाद अँधेरा छाने लगा। अब रात के खाने की तैय़ारी का वक्त हो चला था छोटे से पतीले मे चावल और मसर की दाल मिला कर पकने की इंतजार करने लगे मोसम भी साफ़ था कुछ अंतराल के बाद खाना तैयार हो गया खाना खाने के बाद हम सो गये। मेरा स्लीपिंग बैग देसी था वोह इस तरह के ट्रेक के लिए नहीं बना था रातभर मैं ठण्ड के कारण सो नहीं पाया रात के करीब १:३० बजे मैं उठ गया और अपने मोबाइल में कुछ पुराने गाने सुनने लगा, अचानक बहार ऐसा लगा मानो बर्फ गिर रहा हो। मुझे लगा नींद नहीं आने के कारण यह सब महसूस हो रहा हो , कुछ देर के बाद मैने अपने दोस्त को आवाज़ दी की बहार बर्फ गिर रही है वोह जाग गया और बोला बाबा यह हो ही नहीं सकता है यार मोसम तो साफ़ था... हम दोनों जब बाहर निकले तो देखा जोर की बर्फ़बारी हो रही थी। अब हम दोनों फस चुके थे न आगे जा सकते न वापिस। बस सुबह का इंतजार था इसी कशमाःकश मे रात गुजर गयी। सुबह तक २ फीट ताज़ा बर्फ गिर चूकी थी हम दोनों के पास केवल २ दिन का राशन था और वहां पर रुकने का सवाल ही नहीं था।

सुबह होते ही हम दोनों अपने सामान को समेट कर वापिस चल पडे। आगे घना कोहरा था और बर्फ़बारी मे कुछ साफ़ साफ़ नज़र नहीं आ रहा था हमारा अगला पड़ाव पतेम था जहां लोकल लोगो की ज़मीन और कुछ एक मकान थे। कुछ देर चलते रहे बर्फ के बीच चलना भी कठीन हो रहा था और रास्ते का पता भी नहीं लग रहा था कुछ कदम चलने के बाद सांस लेना भी कठिन हो गया बस एक दूसरे को कोसते हुए हम चल रहे थे जो रास्ता केवल मात्र २ घंटे का था हम दोनों को पार करते उसकाे लगभग ४ घंटे लग गये कुछ देर चलने पर घर नज़र आने लगा मन को सुकून मिला लगा मानो हम दोनों को कोई खज़ाना मिल गया यह ख़ुशी भी पल भर का ही था जब दरवाजे के पास जा कर देखा तो बड़ा सा एक ताला लटक रहा था। .........यात्रा जारी है .............

Miyar Valley, Lahaul-Spiti (20)

कुछ सपने

कुछ सपने

कुछ छोटे सपनो के बदले,
बड़ी नींद का सौदा करने,
निकल पडे हैं पांव अभागे, जाने कौन डगर ठहरेंगे !
वही प्यास के अनगढ़ मोती,
वही धूप की सुर्ख कहानी,
वही आंख में घुटकर मरती,
आंसू की खुद्दार जवानी,
हर मोहरे की मूक विवशता,चौसर के खाने क्या जाने
हार जीत तय करती है वे, आज कौन से घर ठहरेंगे
निकल पडे हैं पांव अभागे,जाने कौन डगर ठहरेंगे !

Miyar Valley, Lahaul-Spiti (24)